श्री विंध्यवासिनी शरणं मम्
श्री विंध्य पर्वत का क्षेत्र जो काशी व प्रयागराज के मध्य श्री भागीरथी गंगा जी के तट पर विराजमान है उसे ही भूलोक का मणि द्वीप कहते हैं जहां भगवती राजराजेश्वरी महात्रिपुर सुंदरी विंध्यवासिनी वनदुर्गा साक्षात् रुप से नित्य विराजित हैं।
वर्ष पर्यंत होने वाले विभिन्न दिव्य पर्वकाल में साधक परिवार द्वारा विभिन्न तीर्थ व धामों में सनातनियों के नित्य कल्याण हेतु अनुष्ठानों का आयोजन होता है। चैत्र नवरात्र, महाभैरव जयंती, हनुमान जयंती, दसों महाविद्यायों की जयंती, अक्षय तृतीया, शरभ प्रत्यंगिरा जयंती, सोमवती अमावस्या, शनिचरी अमावस्या, भौम प्रदोष, बुधाष्टमी , गुप्त नवरात्र,रवि पुष्य , गुरु पुष्य, विभिन्न पूर्णिमा, श्रावण मास, भाद्रपद महागणपति नवरात्र, पितृ पक्ष , आश्विन नवरात्र , शरद कार्तिक मार्गशीर्ष, महाशिवरात्रि,होलिका दीपावली महा अष्टमी के विभिन्न दिव्य पर्वकाल पर काशी , विंध्य पर्वत, प्रयागराज, मथुरा-वृंदावन, कामरुप कामाख्या शक्तिपीठ आदि दिव्य क्षेत्रों में आगमोक्त अनुष्ठानों का आयोजन होता है।




















